About Me

My photo
Bharat Solanki,the Author & Publisher of SUDARSHANAM which reveals The History & Individual Development of Marwari Rajasthani People from Bagol Past till Present.

Thursday, May 6, 2010

पीपीएफ और बीमा में ज्यादा निवेश तो नहीं कर रहे आप

पब्लिक प्राविडेंट फंड (पीपीएफ) और बीमा में धन लगाना ठीक है लेकिन आप दौलतमंद बनना चाहते हैं तो अपना नजरिया बदल लीजिए। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर साजिद फ्लेक्सवाला ने एक पाठक धीरज को बताया कि कहां, कैसे और कितना निवेश करना चाहिए।

मैं 40 साल का हूं और मेरी दस साल की बेटी है। मैं उदयपुर की एक निजी कंपनी में काम कर रहा हूं और सालाना 4 लाख का वेतन पाता हूं। मेरे ऊपर 6 लाख रुपए का फ्लोटिंग ब्याज दर वाला कर्ज है।
मेरे खर्च इस प्रकार हैं-
परिवार के खर्च : 1.2 लाख रुपए सालाना
ईएमआई हाउसिंग लोन : 90,000 रुपए सालाना
मेरे निवेश इस प्रकार हैं
एलआईसी, पीपीएफ : एक लाख रुपए सालाना
मेरी आशंकाएं-
शेयरों में धन लगाने को लेकर मुझे डर रहता है
मेरे पास आय का दूसरा कोई स्रोत नहीं है
मेरे संदेह-
अगले 10-15 साल में कहां निवेश करूं ताकि सेवानिवृत्ति के बाद मेरे पास पर्याप्त धन हो जाए।
-धीरज
कुमार, उदयपुर

आप अपने हाउसिंग लोन या घरेलू खर्च को लेकर समझौता नहीं कर सकते। अब हमारे पास जीवन बीमा (एलआईसी) और पीपीएफ ऐसे निवेश विकल्प हैं, जिसकी पुनररचना की जा सकती है। मेरी राय में तो आप एलआईसी और पीपीएफ में आप अपनी आय के हिसाब से ज्यादा निवेश कर रहे हैं।हमें यह पता नहीं है कि आप एक लाख रुपए सालाना की निर्धारित रकम में से कितना पीपीएफ में निवेश कर रहे हैं और एलआईसी में कितना धन लगा रहे हैं। आइए इन प्रकरणों का अध्ययन करें-

केस 1 : अगर आप पीपीएफ में ज्यादा निवेश कर रहे हैं।
आपकी स्थिति संभल सकती है। पीपीएफ एक अच्छा निवेश है लेकिन इस पर केवल आठ फीसदी प्रतिफल मिलता है। जबकि दौलत कमाना है तो आपकी रणनीति बदलनी होगी। आप और भी ज्यादा प्रतिफल कमा सकते हैं अगर आप सेवानिवृत्ति का विकल्प ध्यान में रखें।

मेरे सुझाव इस प्रकार हैं
साजिद फ्लेक्सवाला का जवाबः
1. एलआईसी को छोड़कर बाकी सभी 80 सी के योगदान बंद कर दीजिए ।
2. पीपीएफ खाते को जीवित रखने के लिए हर साल 1,000 रुपए जमा कीजिए ।
3. म्यूचुअल फंडों की इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में निवेश के लिए बाकी धन (एलआईसी प्रीमियम और 1,000 रुपए पीपीएफ हटाने के बाद एक लाख रुपए में से बची शेष राशि) का इस्तेमाल कीजिए। आपके पास 3 साल का लॉक इन होगा। आप 5-7 साल में अच्छा मुनाफा कमा पाएंगे।

केस 2 : अगर आप बीमे में बहुत ज्यादा निवेश कर रहे हैं
मान लें कि आपकी पालिसी का चुकारा हो चुका है (यानी आप अपनी पालिसी के तीन साल पहले ही पूरे कर चुके हैं) अगर तीन साल से कम अवधि है तो मानलें कि तीन साल पूरे होने तक आपको भुगतान करना है। आपको एक विशेषज्ञ की राय इसमें लेनी चाहिए क्योंकि बीमा की राशि और प्रीमियम आदि मसले इसमें प्रभावी होते हैं। आपकी उम्र में 10 लाख रुपए की जीवन बीमा पालिसी में 5,000 से 6,000 रुपए सालाना से ज्यादा की लागत नहीं आनी चाहिए। मैं इस मामले में सावधि पालिसी का सुझाव दूंगा। बीमा के लिहाज से आदर्श स्तर 30 लाख रुपए है।
आपको कहां निवेश करना चाहिए?
आपका आयकर 25,000 रुपए सालाना की रेंज में रहेगा। आपकी देनदारियों को देखते हुए लगता है कि आपके खर्च निकालने और सेक्शन 80सी में निवेश के बाद 7,000-8,000 रुपए हर महीने बचा सकते हैं। आपको सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लानिंग (एसआईपी) का इस्तेमाल इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए करना चाहिए। अगर आप 8,000 रुपए प्रति माह निवेश करते हैं तो आपके पास 15 साल में 54 लाख रुपए [इक्विटी निवेश में 15 फीसदी प्रतिफल की दर से हिसाब लगाएं] होंगे। अगर आपको बोनस या वेतनवृद्धि मिलती है तो आप कुछ ब्लूचिप कंपिनयों में निवेश कर सकते हैं। इस बुनियादी नियम का पालन करिए। पंद्रह साल में आपके पास बड़ी रकम होगी। सेक्शन 80सी में निवेश करके आप टैक्स बचा सकते हैं और इससे आपको बच्चो की उच्च शिक्षा और विवाह जैसी जिम्मेदारियों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। सोना, रीयल एस्टेट जैसे विकल्पों को जीवन के उत्तरार्ध में अपनाना चाहिए।

Guide For Mutual Fund Investor

म्यूचु्अल फंड निवेशकों के लिये कुछ सुझाव

पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को अधूरी जानकारी होती है और ज्यादातर वे निवेश की परिस्थितियों में आने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित हो जाते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड निवेश में बाजार के समय से भी अधिक महत्वपूर्ण बातें हैं जो ध्यान रखनी चाहिये।

सबसे पहले ध्यान रखे

एक महत्वाकांक्षी यूनिट धारक को सबसे पहले ये तय करना चाहिये कि वो किस तरह के पोर्टफोलियो (निवेश सूची) का निर्माण करना चाहता है। दूसरे शब्दों में उसे अपनी सम्पत्ति के सही विनियोजन का फैसला करना चाहिये।ये ऐसेट एलोकेशन (asset allocation) कहलाता है। ऐसेट एलोकेशन वो तरीका है जो ये निर्धारित करता है कि आप अपने पैसे को विभिन्न निवेशों में कैसे लगायें जिसमें सम्पत्ति के सभी वर्गों का उचित मिश्रण हो।

ऐसेट एलोकेशन के लोकप्रिय नियम कहते हैं कि निवेशक की जो भी उम्र हो,उसे अपने पोर्टफोलियो में अपनी उम्र जितना धन प्रतिशत रखना चाहिये। उदाहरण के लिये- यदि निवेशक की उम्र 25 साल है तो उसे अपने निवेश का 25% ऋण (debt instrument) में और शेष इक्विटी में लगाना चाहिये।

हालांकि वास्तविकता में, प्रत्येक व्यक्ति की विभिन्न परिस्थितियों और वित्तीय हालत के अनुसार अलग अलग निवेश आवंटन की जरूरत हो सकती है। ऐसेट एलोकेशन को समझने के लिये आपको विभिन्न कारको की भी जानकारी होनी चाहिये जैसे-आयु, व्यवसाय, आप पर निर्भर परिवार के सदस्यों की संख्या आदि। सामान्यतः जितने अधिक आप युवा हैं उतने ही जोखिम भरे निवेश आप रख सकते हैं जिनसे आपको बेहतर रिटर्न मिले।

सही फंड कैसे चुनें

सही फंड चुनने के लिये ध्यान रखें— कि सही फंड चुनने की कुंजी उनके निवेश सिद्धांत और रिटर्न देने की स्थिरता पर निर्भर करती है। आप सही फंड चुनें जो आपकी जरुरतों के लिये उपयुक्त हो, ये सुनिश्चित करने के लिये निम्न बातों पर विचार करें:

• अपने आर्थिक लक्ष्यों को निर्धारित करें।

• क्या आप अपनी सेवानिवृत्ति के लिये निवेश कर रहे हैं ?य़ा अपने बच्चे की शिक्षा के लिय ?, या फिर वर्तमान आमदनी के लिये ?

• अपनी समय सीमा पर विचार करें। क्या आपको तीन महिने के समय में पैसा चाहिये या फिर तीन साल में ? , जितना विस्तृत आपका समय होगा उतना ज्यादा जोखिम आप निवेश में उठाने के काबिल होंगे।

• आप जोखिम उठाने के बारे में क्या सोचते हैं ? क्या आप उच्च रिटर्न की संभावना के लिये शेयर बाजार के उतार चढाव को बर्दाश्त करने की स्थिति में हैं? आपको अपने स्वंय की जोखिम उठाने की क्षमता के बारे में अवश्य पता होना चाहिये,यह सही निवेश योजना को चुनने के लिये एक गाइड हो सकता है। याद रखें,संभावित रिटर्न की चिन्ता किये बिना यदि आप किसी विशेष परिसंपत्ति वर्ग के साथ सहज नही हैं तो आपको अन्य निवेश विकल्पों पर विचार करना चाहिये।

• ध्यान रखें-इन सभी कारकों का सीधा प्रभाव उन फंड पर पङता है जिन्हें आप चुनते हैं और जो रिटर्न आप प्राप्त करने की उम्मीद रखते हैं।

फंड कैन्डी

• विविध इक्विटी फंड
• इंडैक्स फंड
• अवसर फंड
• मिड कैप फंड
• इक्विटी लिंक्ड बचत योजनायें
• सेक्टर फंड जैसे ऑटो, हंल्थ केयर,एफएमसीजी,बैंकिंग,आई.टी इत्यादि
• संतुलित फंड उनके लिये जो इक्विटी निवेश में 100% जोखिम नही उठाना चाहते


(अगर सही ढंग से चुने जायें तो ये अन्य संपत्ति वर्गों की तुलना में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं).

अगर आप जोखिम उठाने की हिम्मत के साथ एक लंबी अवधि के निवेशक हैं और मुद्रास्फीति को हराने के लिये रिटर्न की तलाश में हैं तो इक्विटी फंड सर्वोच्च चुनाव है। म्यूचुअल फंड विभिन्न प्रकार की इक्विटी और इक्विटी आधारित योजनाओं (देखें फंड कैन्डी) को पेश करता है। शुरूआत में विविध फंड के साथ निवेश करना उचित होगा और धीरे धीरे आप ऋण जोखिम के क्षेत्र और विशेष फंड में भी हाथ आजमा सकते हैं।

नजर रखें

सिर्फ आवेदन फॉर्म भर देना और चेक लिखना ही काफी नही है। आपके निवेश कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं , इस पर नजर रखना भी उतना ही जरूरी है। एक योग्य और पेशेवर निवेश सलाहकार जो आपको सही निर्णय लेने और आपके निवेशों के प्रदर्शन के मापने दोनों में सहायता कर सकता है। साथ ही आपको ये भी जानना चाहिये कि आप खुद की छोटी सी मदद निम्न स्त्रोतों के द्वारा कैसे कर सकते हैं।

फैक्ट शीट और न्यूजलैटर

म्यूचुअल फंड मासिक और त्रैमासिक फैक्ट शीट और न्यूजलैटर प्रकाशित करते हैं जिनमें पोर्टफोलियो की जानकारी ,फंड मैनेजर द्वारा प्रबंधित योजनाओं और उनके प्रदर्शन आंकङों की रिपोर्ट प्रकाशित होती है।

वेबसाइट

म्यूचुअल फंड की वेबसाइट प्रदर्शन आंकङे , दैनिक NAV (नेट ऐसेट वैल्यू) , फंड फैक्ट शीट , त्रैमासिक न्यूजलैटर और प्रेस क्लिपिंग इत्यादि उपलब्ध कराती है। इसके अलावा भारत में म्यूचुअल फंड एसोसियेशन( AMFI ) की वेबसाइट भी है जिसमें दैनिक और ऐतिहासिक NAV और अन्य योजनाओं के बारे में सूचना होती हैं।

समाचार पत्र

समाचार पत्र के पृष्ठों में म्यूचुअल फंड योजनाओं की बिक्री , NAV और रिडेम्पशन मूल्य की जानकारी होती है। इसके अलावा अन्य आर्थिक विश्लेषण और रिपोर्ट भी होती हैं।

याद रखें

आपके लिये सही सूचना की जानकारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसे पाने के लिये आपको बस थोङा सा समय सूचना को समझने और विश्लेषण करने में खर्च करना होगा। जो आपके निवेश की सफलता की संभावना को बढाने के लिये जरूरी है। जितना समय आप धन कमाने में लगाते हैं अगर उसका एक प्रतिशत भी इस पर खर्च करें तो ये अच्छी शुरूआत होगी। इन सबसे ज्यादा एक पेशेवर सलाहकार की मदद सही फंड चुनने के लिये लें जिसमें SIP(सिस्टेमैटिक इन्वेस्ट प्लान),STP(सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान), और एकमुश्त निवेश का सही मिश्रण हो।

Friday, April 16, 2010

मेडिक्लेम का कार्ड सिर्फ दिखावा

आपकी जेब में रखा हुआ मेडिक्लेम का कार्ड कहीं सिर्फ दिखावा भर न साबित हो। हो सकता है, जब आपको इसकी जरूरत पड़े, तब आपको बीमा कंपनी क्लेम ही न दे। हकीकत में जिस तेजी से हेल्थ इंश्योरेंस का चलन बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से दावे खारिज होने का औसत भी बढ़ रहा है। लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें बीमा कंपनियां क्लेम का भुगतान नहीं करती हैं। ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पॉलिसीधारक बीमा कराने के बाद खुद को निशिंचत समझता है। पर उसे हकीकत का अंदाजा तब होता है, जब बीमारी सामने आती है और वो अस्पताल में भर्ती होता है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पॉलिसीधारक बड़ी उम्मीद से भर्ती होता है। पर जैसे ही उसके केस को टीपीए (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) के पास भेजा जाता है, उसका दावा खारिज कर दिया जाता है।

सेहत के बार में बताएं: वास्तव में तो मेडिक्लेम का कार्ड सिर्फ एक परिचय पत्र के अलावा और कुछ भी नहीं हैं दावे का भुगतान या केश लेश की सुविधा पोलिसी की वैधता पर निर्भर करती हैं। इसके लिए आपके द्वारा पोलिसी लेते वक्त प्रस्ताव पत्र में दिए गए सवालो के जवाब और रेनेवल चेक के भुगतान की प्रमाणिकता यानि आपकी बैंक पास बुक स्टेटमेंट की कोपी। कई बार ऐसा होता हैं की आप प्रस्ताव पत्र भरते समय जवाब में लिखते हैं मुझे कोई बीमारी पूर्व में नहीं हुई थी पर जब आप हॉस्पिटल में भरती होते हैं तब आप अपने डॉक्टर को अपनी पूर्व बीमारियों का ब्यौरा जरुर लिखवाते हैं ध्यान रहे बीमा कम्पनी और पोलिसीधारक के बीच, आपके द्वारा दिए गए सत्य कथनों पर आधारित एक अनुबंध ही आपकी पोलिसी दस्तावेज हैं। आपको अपनी मेडिकल हिस्ट्री बीमा कंपनी से छिपानी नहीं चाहिए। इसका आगे चलकर बड़ा फायदा मिलता है। ज्यादातर कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी करते वक्त मेडिकल चेकअप को तरजीह नहीं देती हैं। ऐसे में ये आपकी जिम्मेदारी है कि आप बीमा कंपनी को बता दें कि आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं या फिर आपको फला बीमारी है। आप ये भी कर सकते हैं कि उस कंपनी की ऐसी पॉलिसी खरीदें, जिसमें मेडिकल टेस्ट जरूरी हो।

कंपनियों का रवैया ठीक नहीं: जानकार लोगो के मुताबिक बीमा कंपनियों का रवैया हमारे देश में अच्छा नहीं है। हमारे यहां इन चीजों पर कोई ध्यान भी नहीं दे रहा है। दरअसल हेल्थ इंश्योरेंस का कांसेप्ट हमारे यहां पश्चिमी देशों से आया है। वहां ज्यादातर पॉलिसीधारक और बीमा कंपनियां अपनी जिम्मेदारियों को समझते हैं। पॉलिसीधारक जहां अपनी पूर्व की बीमारियों का खुलासा कर देते हैं, वहीं बीमा कंपनियां क्लेम को मंजूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रयास करती हैं। पर हमारे यहां अभी ऐसा नहीं हो पा रहा है। फिर भी किसी भी शख्स को सेहत का बीमा कराने से पहले कुछ बातों को जेहन में रखना चाहिए। सच्चाई को किसी भी सूरत में छिपाना नहीं चाहिए।

भर्ती होना जरूरी : अधिकतर बीमा कंपनियां किसी भी मेडिक्लेम के लिए कम से कम 24 घंटे भर्ती होना जरूरी मानती हैं। परन्तु मोतिया बिंदु, हर्निया, एपेंड़ेक्स, हैड्रोसिल,स्टोन रेमोवल,पाइल्स, कोरोनरी एन्जिओग्राफी एन्जिओप्लासटी आदि बहुतसी सर्जरी चिकित्सा जिसमे अनावश्यक 24 घंटे भरती रहना जरुरी नहीं हैं इसके लिए बिमा कंपनी एवं टी पी ए द्वारा अथवा पालिसी दस्तावेज में दर्ज चिकित्सा सूचि को देखना जरुरी हैं । अगर पॉलिसीधारक पॉलिसी खरीदने के शुरुआती 30 दिनों में आकस्मिक दुर्घटना के अलावा किसी अन्य बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होता है तो होने वाले खर्च के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी। इसके साथ ही पहले से चली आ रही बीमारियों का खर्च भी बीमा कंपनियां नहीं उठाती हैं। हालांकि कुछ सर्जिकल बीमारियां पॉलिसी लेने के दो और चार साल बाद कवर की जाती हैं।

बीमा राशि: योजना के तहत बीमा कंपनीया बीमा राशि के अनुपात में ही एक प्रतिशत प्रति दिन रूम रेंट के अलावा डॉक्टर एवं सर्जन फीस इत्यादि दावो का कम से कम भुगतान बीमा राशि के अनुपात में ही करती हैं। इसलिए अस्पताल में रूम का निर्धारण हमारी बीमा राशि को देखकर करना चाहिए। अस्पताल में भर्ती होने से तीस दिन पहले के सभी खर्चे के साथ डॉक्टर के परामर्श शुल्क और छुट्टी लेने के ६० दिन तक की दवाई बिल इत्यादि का खर्च का भुगतान भी किया जाता हैं ।


क्लेम कैसे करे:
अस्पताल में भरती होने की सूचना तुरंत चौबिश घंटे के अन्दर हस्तलिखित सूचना परिवार के सदस्यों द्वारा बीमा कम्पनी अथवा टी पी ए को फेक्स द्वारा भेज कर कन्फर्म कर लेना चाहिए की सूचना मिली की नहीं और अगर मिल गई हो तो क्लेम फॉर्म भेजने की मांग करनी चाहिए ।सूचना में पोलिसी नम्बर, रोगी एवं अस्पताल का नाम पता और संपर्क नंबर सहित भरती होने का कारण और दिनांक समय की समूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ।

कागजात सही लगाएं: क्लेम फॉर्म के साथ वर्तमान पॉलिसि कोपी के अलावा तमाम ओरिजनल हॉस्पिटल बिल और पेमेंट रसीद , मेडिकल स्टोर बिल डोक्टर द्वारा लिखी गई प्रिस्क्रिप्सन सहित , मेडिकल रिपोर्ट्स और उसके बिल, इनडोअर केसपेपर फोटोस्टेट कोपी हॉस्पिटल अथोरिटी द्वारा सत्यापित डॉक्यूमेंट लगाने होते हैं। जान लें कि बीमा कंपनी में बिल और दूसरे दस्तावेजों की फोटोस्टेट कॉपी या डुप्लीकेट कॉपी स्वीकार नहीं की जाती है अपने रेकोर्ड के लिए एक सेट सम्पूर्ण फोटोस्टेट कॉपी जरुर रखे रहे । ज्यादातर कंपनियां अस्पताल भर्ती होने के 60 दिनों के अंदर किए गए दावे को स्वीकार करती हैं। कुछ कंपनियों ने दावे के फॉर्म के साथ मेडिकल प्रेक्टिशनर सर्टिफिकेट और प्रिस्किप्शन लगाना भी जरूरी कर दिया है। इस तरह की सभी जानकारियां पॉलिसी दस्तावेजों में उपलब्ध होती हैं। इसके बारे में आप कंपनी के अभिकर्ता या किसी अधिकारी से जानकारी ले सकते हैं। ध्यान रहे बीमा अभिकर्ता आपकी मेडिक्लेम पोलिसी को समय पर रेनेवल कराने में सहायता करता हैं और आपका सहयोग ही दावे की प्रक्रिया में सलाहकार के रूप सहयोगी बनता हैं । वैसे दावो के निपटान भुगतान की तमाम जिम्मेदारी टीपीए एवं बीमा कंपनी की रहती हैं।

Saturday, March 6, 2010

Dont recycle investment to save taxes

Mumbai: Recycling may be a great idea when it comes to environment.However,in the world of finance,it is often met with disapproval.Recycling money to save taxes is a common method employed by many investors every year.For example,some people withdraw money from their existing public provident fund (PPF) account to make fresh investments to claim tax break,whereas others use the maturity proceeds from national saving certificate (NSC) or similar schemes to fund their tax saving programme.
According to financial experts,investors should not take this easy way out as it robs them of the chance to create more wealth.The only time this method can be employed is when one is in dire need for cash due to unforeseen circumstances.It is an old trick.A lot of people have been taking money out of their PPF account to make fresh investment and claim tax benefit, says an investment adviser.What is worrying is that many so-called experts are suggesting this method to their clients to save taxes.For example,many investors are advised to redeem money from their tax saving mutual fund scheme after the lock-in period of three years and invest again (sometimes in the same scheme) to claim tax breaks, he adds.
According to financial advisers,this is not such a smart and easy method as its proponents claim.We dont encourage this unless the client has some serious financial trouble, says Kartik Jhaveri,director,Transcend Consulting,a wealth management firm.The basic idea behind tax planning is to create long-term wealth while claiming tax breaks.When you recycle the money,you are not creating any new wealth.You are only circulating the same money again and again, he adds.
Many financial experts frown upon investment recycling because they think the easy way out may result in many investors abandoning financial discipline.Tax planning should be part of your overall financial planning.You should start saving your taxes at the beginning of the financial year just like you save for your retirement or childs education, says a wealth manager,who doesnt want to be quoted.If you fail to do it in a systematic fashion,you may be scrambling for funds at the last moment.You may end up sacrificing some of your other objectives, he adds.He says the method could land people in trouble with the taxman.
However,Kirit Sanghvi,a CA,says that,as per the law,there is nothing wrong in recycling money to claim tax breaks.Earlier,there was a provision that one should invest from the taxable income to claim tax breaks.Even then people used to recycle money, he says.The only thing that is a must is that the investment shouldnt exceed the income, he adds.

Tuesday, November 17, 2009

LIFE INSURANCE COVER TERM PLAN

वित्तीय सुरक्षा के लिए जीवन बीमा कराना सबसे जरूरी है इसके लिए प्लानिंग बेहद अहम है। अगर आप लाइफ इंश्योरेंस कराने जा रहे हैं, तो इसके लिए कोई अच्छी पॉलिसी चुनें। जीवन बीमा दूसरे किसी भी बीमा से ज्यादा जरूरी होता है इससे आपके बाद आपके परिवार को वित्तीय सुरक्षा हासिल होती है। लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में भी आपके पास कई तरह के विकल्प हैं। अगर अच्छे लाइफ इंश्योरेंस कवर की बात की जाए, तो टर्म इंश्योरेंस सबसे बेहतर है। कम से कम खर्च में बेहतर कवर के लिए टर्म इंश्योरेंस काफी अच्छा है। टर्म इंश्योरेंस में पूरा लाइफ कवर मिलता है। पॉलिसी लेने वाले की मौत पर उसके आश्रितों को पॉलिसी की पूरी रकम दी जाती है। पर इसकी एक खामी भी है वो ये कि टर्म इंश्योरेंस में बीमा की रकम केवल पॉलिसी धारक के मरने पर ही दी जाती है। अगर पॉलिसी धारक पॉलिसी की समय अवधि से ज्यादा जीता है, तो काई भी आर्थिक मदद नहीं मिलती है। प्रीमियम का भी कोई हिस्सा वापस नहीं किया जाता है। मतलब टर्म पूरा होने पर आपको कुछ भी नहीं मिलता है।

कितनी हो बीमा राशि:लोग अक्सर बीमा की राशि को लेकर परेशान होते हैं। आखिर कितनी रकम का बीमा लें जो परिवार को पूरी वित्तीय सुरक्षा दे सके। ऐसे में सबसे सामान्य तरीका है एचएलवी का आकलन करना। एचएलवी यानी ह्मूमन लाइफ वैल्यू इसमें व्यक्ति के जीवन की कीमत को आंका जाता है। इसके साथ ही बीमा कराने के लिए एक तरीका और इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें महंगाई और दूसरे लंबे समय के खचरें का ध्यान रखा जाता है। इसके तहत बच्चों की पढ़ाई, शादी, बकाया लोन के भुगतान और दूसरे सभी खरचे और मौजूदा बचत को जोड़ें। आपके खर्च और बचत का अंतर ही आपके पॉलिसी कवर की राशि होनी चाहिए।

सिंगल प्रीमियम प्लान: टर्म इंश्योरेंस में कई तरह के प्लान होते हैं। सिंगल प्रीमियम प्लान के नाम से ही जाहिर है कि इसमें पॉलिसी के लिए एक ही बार प्रीमियम भरना होता है। एक निश्चित समय अवधि के कवर के लिए एक साथ प्रीमियम लिया जाता है।

रेगुलर प्रीमियम प्लान: अगर आप एक ही बार में पूरा प्रीमियम नहीं दे पा रहे हैं, तो आप रेगुलर प्रीमियम प्लान का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें टर्म की अवधि पूरी होने तक हर साल प्रीमियम की एक निश्चित राशि चुकानी होती है।

टर्म प्लान में प्रीमियम की वापसी: आमतौर पर टर्म प्लान में अगर पॉलिसी धारक टर्म से ज्यादा जीता है, तो कोई भी कवर नहीं मिलता। साथ ही प्रीमियम की भी वापसी नहीं होती। पर ये प्लान और बीमा कंपनी पर निर्भर करता है। कई कंपनियों के प्लान में प्रीमियम वापसी का भी प्रावधान होता है। टर्म पूरा होने पर ब्याज के साथ या बिना ब्याज के प्रीमियम वापस किया जाता है। पर ऐसे टर्म प्लान में आम टर्म प्लान की तुलना में ज्यादा प्रीमियम लिया जाता है।

मॉर्गेज कवर टर्म एश्योरेंस: लाइफ कवर के अलावा टर्म प्लान लोन के लिए भी लिया जा सकता है। ये आपके बकाया लोन के लिए इंश्योरेंस होता है। लोन के लिए दी जाने वाली ईएमआई (मासिक किस्त) के साथ लोन की बकाया राशि घटती जाती है। और इसी के साथ इंश्योरेंस कवर की राशि भी घटती है। इस पॉलिसी के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम के लिए भी समय अवधि निश्चित की जाती है। लोन लेने वाले के मरने पर लोन की बकाया राशि के लिए कवर मिलता है। ऐसे में लोन लेने वाले के मरने पर परिवार पर लोन चुकाने का बोझ नहीं पड़ता है।

अतिरिक्त राइडर्स: टर्म पॉलिसी एक लाइफ कवर पॉलिसी होती है। इसमें पॉलिसी धारक के मरने पर ही परिवार को कवर दिया जाता है। क्रिटिकल इलनेस और दुर्घटना जैसी स्थितियों के लिए कोई कवर नहीं मिलता। ऐसे में पोलीसी पर मिलने वाले अतिरिक्त राइडर्स मदद करते हैं। टर्म पॉलिसी के साथ डबल एक्सीडेंट बेनेफिट राइडर, क्रिटिकल इलनेस बेनेफिट राइडर और डिसएबिलिटि बेनेफिट राइडर की सुविधा होती है। अपनी जरूरत के मुताबिक आप कवर लेकर इसका फायदा उठा सकते हैं।

कैसे चुनें सही प्लान:बाजार में मौजूद तमाम टर्म प्लान लगभग एक जैसे फायदे देते हैं। ऐसे में कौन सी पॉलिसी ली जाए, इसका निर्णय मुश्किल हो जाता है। विभिन्न टर्म पॉलिसी की तुलना में इसकी प्रीमियम राशि की तुलना करें। कम से कम प्रीमियम पर ज्यादा लंबी अवधि के लिए कवर देने वाला टर्म प्लान सबसे बेहतर चुनाव होगा।

कौन ले सकते हैं टर्म प्लान:ऐसे निवेशक जो व्यापार में ज्यादा जोखिम उठा सकते हैं, उन्हें टर्म प्लान लेना चाहिए। अगर आप लाइफ कवर को सामान्य निवेश से अलग रखना चाहते हैं, तो टर्म प्लान बेहतर चुनाव होगा। साथ ही ऐसे लोग जो निवेश-आधारित प्लान नहीं खरीद सकते, वे टर्म प्लान ले सकते हैं। बड़ा लाइफ कवर चाहने वाले बड़े निवेशक (एचएनआई) भी टर्म प्लान में पैसा लगा सकते हैं। पर कोशिश करें की लंबी अवधि के लिए प्लान लिया जाए। निवेश की मैच्योरिटी के बाद रिटर्न पाने की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए टर्म प्लान नहीं है।

Sunday, November 8, 2009

BANK DEPOSIT,UNIT LINK & MUTUAL FUND PRODUCT

बैंक में फिक्स डिपॉजिट करने जाओ और आप वंहा से क्या लेकर आ रहे हैं आपको मालूम होना चाहिए क्योकि आज अधिकतर बैंक इंश्योरेंस पोलीसी बेच रही हैं कई लोगो से शिकायते मिल रही हैं की वे बैंक में सिंगल डिपॉजिट करने गए थे मगर बैंक अधिकारियो ने पूरी जानकारी दिए बिना दस साल की यूनिट लिंक बीमा पॉलिसी उनके नाम कर दी, बाद में जब ग्राहक पूछताछ करने पर जानकारी लेने बैंक जाता हैं तब बताया जाता हैं की तीन साल प्रीमियम भरना हैं और जब इसको कैंसल करने की बात आती हैं तो पच्चास हजार की पूंजी बीस हजार हाथ में आती हैं ।
आप बैंक में गए तो फिक्स डिपॉजिट करने और जब निकले तब आपके हाथ में बीमा पॉलिसी लेकर, पॉलिसी लेते वक्त आपको कौनसी बातो का ध्यान रखना चाहिए ?
क्या आपको मालूम हैं आप जो पॉलिसी लेने जा रहे हो उससे आपकी जररत, जैसे की बच्चो की एजुकेशन, शादी या रिटायर्मेंट की जरुररत पूरी हो जायेगी ?
आप जो पॉलिसी ले रहे हैं वह किस तरह की पॉलिसी हैं, ट्रेडीशनल, यूनिट लिंक अथवा टर्म इंश्योरेंस ?
आखिर क्या फर्क हैं इन तीनो पॉलिसी में ट्रेडीशनल यानि की वर्षो से चली आ रही बचत युक्त बंदोबस्ती और मनि बेक पॉलिसी, यूनिट लिंक यानि मार्केट इकुइटी शेअर बेस प्रोडक्ट और टर्म इंश्योरेंस का मतलब हैं सिर्फ इंश्योरेंस बिना किसी बचत या निवेश ।
आज कल निवेश पर अच्छा मुनाफा पाने के लिए लोग यूनिट लिंक प्रोडक्ट अधिक खरीद रहे हैं लेकिन इस तरह की पॉलिसी में रिस्क कवर होने के कारण बीमा कम्पनिया अपने बीमा चार्जेस एवं फंड मेनेजमेंट फीस के रूप में अधिकतर राशि अपने पास रख कर शेष रकम बाजार में निवेश करती हैं इसलिए जो लोग बाज़ार बेस प्रोडक्ट में निवेश करना चाहे उन्हें बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक प्रोडक्ट लेने के बजाय म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट में निवेश करना चाहिए और टर्म इंश्योरेंस बीमा कम्पनी से खरीद ले ताकि निवेश का पूरा हिस्सा निवेश हो जाता हैं और अतिरिक्त शुल्क से बच सकते हैं। एस्सेट मेनेजमेंट कंपनिया म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट में बीस से तीस प्रतिशत वार्षिक मुनाफा लोंग टर्म सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान में दे रही हैं उनमे टाटा, बिरला, रिलायंस और एचडीऍफ़सी आदि कई कम्पनिया प्रमुख हैं जो छोटे-छोटे निवेशको की मार्केट में निवेश की रूचि को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित निवेश की सलाह उपलब्ध कराने के लिए एम्प्फी प्रमाणित एडवाइजर भी नियुक्त कर रखे हैं।
लेखक पिछले बीस साल से बीमा, वित् एवं निवेश फाइनेंस कारोबार से जुड़े हुए हैं आप अपनी टिप्पणी और सवाल उपरोक्त विषय पर जरुर करे ।

Saturday, October 24, 2009

Life & Health Insurance

Life & Health Insurance

Life insurance

You will do anything for the ones you love.Thinking about why you need life insurance can be an emotional and stressful task. However, life insurance is one of the most responsible decisions you can make to help ensure that your spouse, children or other loved ones can continue to enjoy the quality of the life they deserve. Life is unpredictable.

So it is important to ensure that your family and loved ones are taken care of financially in case something should happen to you. This is where life insurance comes in.It can provide some financial peace of mind if the worst were to happen.
At NJ Insurance we offer various life insurance solutions, that help you take care of your varied needs like protection, wealth accumulation & long term savings for children's education, children's marriage, retirement, tax savings etc. Should the unexpected happen, you can depend on us to be here for you and your loved ones. We will make the claims process as stress-free as possible and provide the caring assistance you and your loved ones need.

What is Life Insurance?
Life insurance offers a way to replace the loss of income that occurs when someone dies. Life insurance is insurance for you and your family's peace of mind. With a life insurance policy in place, you can:

  • Provide security to your family
  • Protect your home mortgage, loans, credit card borrowings etc.
  • Provide finance to your loved ones to achieve their goals in your absence
  • Ensure that your family is able to maintain their lifestyle, no matter what happens
  • Take care of your estate planning needs
  • Look at other retirement saving/investment vehicles

Health Insurance
Although health insurance can not prevent a serious injury or illness, it can help you maintain financial stability.
A serious injury, disability or critical illness can impact a person's emotional well-being and financial security. And while it can be difficult to think about these things, you will make a smart decision by planning for the unexpected now.
Health insurance is required when an individual is ill or requires medical checkups. It can prevent the patient from being expected to pay out of pocket expenses towards medical bills because they do not have any health insurance. Without health insurance, one may even not be able to afford expensive medical services when needed.
Health insurance can help you and your loved ones to maintain the same lifestyle. It can pay the bills, secure better health care and allow you to focus on what's important—recovery.

Following are some of the benefits for why you should have a Health Insurance:-

  • Helps protect your income - Disability Income Protection Insurance
  • Provides a monthly benefit to help maintain financial stability while you recover from a disability.
  • Long-Term Care Insurance
  • Provides a daily benefit to help you offset the cost of care administered in a long-term care facility or at home.
  • Critical Illness Insurance
  • Provides a lump-sum payment to be used in case of contingency
  • Hospital Cash Plan
  • Provides a daily allowance to help you pay during your hospital stay.



Welcome

Wealth & Health Org

Followers